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प्रदेश के पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री जिला पंचायत सीतापुर के पूर्व अध्यक्ष तथा जिले की राजनीति में काफी प्रभावशाली नेता महेंद्र सिंह वर्मा के दिल्ली के मेदांता हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मृत्यु की सूचना से पूरे क्षेत्र व जिले में शोक की लहर दौड़ गई। महमूदाबाद इलाके के अधिकांश प्राइवेट स्कूल कालेजों में शोक सभाएं आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। स्कूल कालेजों में शोक सभाओं के बाद अवकाश हो गया। श्री वर्मा कई स्कूल-कालेजों के संस्थापक प्रबंधक थे। पोखराकलां स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वाले हजारों लोगों का तांता लगा रहा।
प्रदेश सरकार में काबीना मंत्री और महमूदाबाद से छह बार विधायक रहे नरेंद्र सिंह वर्मा के बड़े भाई महेंद्र सिंह वर्मा का जिले की राजनीति में लंबे समय तक दबदबा कायम रहा। अपने जिला पंचायत अध्यक्ष (2000-2005) के कार्यकाल में महेंद्र सिंह वर्मा ने महमूदाबाद विधानसभा क्षेत्र में प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल स्कूलों की झड़ी लगाने के साथ कई सड़कें भी बनवाईं। उन्होंने अपने राजनीतिक कौशल के बल पर एक समय में अपनी पार्टी द्वारा तय किए गए जिला पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी के विरुद्ध जाकर अजय भार्गव को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन करा दिया तो राजनीति के कई महारथी चौकन्ने राह गए। मुंह पर बेलाग बात करने के लिए और अपने समर्थकों/कार्यकर्ताओं का पूरी तरह ध्यान रखने और उनके सुख-दुःख में हर तरह साथ रहने की उनकी विशेष खूबी के लोग कायल थे। लीवर में कैंसर होने के कारण पिछले कई महीनों से वे बीमार थे। दिल्ली के मेदांता हॉस्पिटल में 13 मार्च को उनका लीवर ट्रांसप्लांट होना था। हॉस्पिटल में सारी तैयारियां पूर्ण थीं। इसीबीच 10 मार्च को हुई चुनावी मतगणना में उनके छोटे भाई नरेंद्र सिंह वर्मा महमूदाबाद से सातवीं बार विधायक बनने से चूककर हार गए। माना जा रहा है कि अपने छोटे भाई से अत्यधिक स्नेह करने वाले नरेंद्र सिंह वर्मा की हार का सदमा वे बर्दाश्त नहीं कर सके और 12 मार्च की सुबह करीब तीन बजे मेदांता हॉस्पिटल में उन्होंने अंतिम सांस ली। सीता ग्रुप ऑफ एजूकेशन, राम अकबाल शिवरानी महाविद्यालय सहित क्षेत्र के लगभग सभी प्राइवेट संस्थानों में महेंद्र सिंह वर्मा को शोक सभाएं करके श्रधांजलि दी गई। अंतिम यात्रा में उमड़ी भारी भीड़ से उनकी लोकप्रियता का लोग अंदाजा लगा रहे थे। हजारों आंखें नम थीं। लोग उनके व्यक्तित्व और कृतित्व की चर्चा करते देखे गए। पैतृक गांव पोखराकलां में उनके बेटे उत्कर्ष वर्मा ने जब उन्हें मुखाग्नि दी तो सभी की आंखें नम हो गईं।
शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का लगा रहा तांता -
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने महेंद्र सिंह वर्मा के निधन पर ट्विटर के माध्यम से शोक संवेदना व्यक्त की। वहीं समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल , समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह देव समेत सांसद सीतापुर राजेश वर्मा, विधायिका महमूदाबाद आशा मौर्या, पूर्व एमएलसी राकेश सिंह, एमएलसी आनंद सिंह, विधायक कुर्सी साकेन्द्र प्रताप वर्मा, सेउता विधायक ज्ञान तिवारी, बिसवां विधायक निर्मल वर्मा, बाराबंकी जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री व पूर्व रेउसा ब्लाक प्रमुख चंद्र कुमार मिश्र, प्रदुम्न वर्मा, विधायक लहरपुर अनिल वर्मा, सपा नेता अफजाल कौशर, प्रदीप गुप्त दीपू, ऊंचाहार विधायक मनोज पांडेय, भाजपा नेता रामपाल यादव, मोहन प्रसाद बारी, अम्बरीश गुप्त, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र यादव, सपा नेता रामहेत भारती, पूर्व एमएलसी भरत त्रिपाठी, रिटायर्ड सीओ महमूदाबाद वीबी सिंह, सीता ग्रुप ऑफ एजूकेशन के चैयरमैन आरके वाजपेयी सहित करीब 20 हजार से अधिक लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
टूटी राम - लखन की जोड़ी -
"उल्टी हो गई सब तड़बीरे , दवा ने न कुछ काम किया..."
सीतापुर के लोगो ने जिले की सियासत मे प्रखर सूर्य की भांति चमकने वाले पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत और पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री महेन्द्र सिंह वर्मा को आज खो दिया है। महेंद्र सिंह वर्मा की आक्रमकता और अपने कार्यकर्ता के लिए जुझारूपन उनका आभूषण था वहीं अपने सरल स्वभाव के लिए जाने पहचाने वाले पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा की यह जोड़ी नेताओ समेत आम लोगों के लिए राम - लखन की जोड़ी थी। लेकिन इस जोड़ी के टूटने के बाद नरेंद्र सिंह वर्मा पर भारी जिम्मेदारियों का बोझ पड़ा है। राम लखन की इस जोड़ी की प्रशंसा चारों ओर हो रही थी कि अपने बड़े भाई के सम्मान में कभी नरेंद्र वर्मा ने कोई कमी नही छोड़ी वहीं महेंद्र सिंह वर्मा ने भी अपने छोटे भाई को हमेशा पितातुल्य स्नेह दिया।
जिले की राजनीति में रहा दबदबा -
महेंद्र सिंह वर्मा वर्ष 2000 से 2005 तक सीतापुर जिला पंचायत के अध्यक्ष रहे। जिले की राजनीति में उनका लंबे समय तक दबदबा रहा। एक बार उन्हें पार्टी ने प्रत्याशी नहीं बनाया तो अधिकृत प्रत्याशी के विरोध में जाकर अजय भार्गव को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जिताकर जिले की राजनीति में अपनी पकड़ दिखाकर राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया था।
पशुधन विकास परिषद अध्यक्ष भी रहे-
महेंद्र सिंह वर्मा समाजवादी पार्टी की सरकार में पशुधन विकास परिषद के अध्यक्ष भी रहे। समाजवादी पार्टी के टिकट पर वह लोकसभा सदस्य का चुनाव भी लड़े थे। इस चुनाव में वह बसपा प्रत्याशी कैसर जहां से पराजित हो गए थे। वह कई शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधक भी थे।
परिवार में पांच बेटी व एक बेटा -
महेंद्र सिंह वर्मा के परिवार में तीन बेटियों कोपल, प्रियंका, नूपुर की शादी हो चुकी है , वहीं प्रिया, रिमझिम व बेटा उत्कर्ष वर्मा अभी अविवाहित हैं।
पैतृक भूमि पर हुआ अंतिम संस्कार -
उनका शव एंबुलेंस से लाया गया जिसके बाद शव यात्रा निकलते हुए अंतिम संस्कार स्थल पहुंची। पोखरा कला गांव में पैतृक भूमि पर उनका अंतिम संस्कार शाम को हुआ। पुत्र उत्कर्ष वर्मा ने उन्हें मुखाग्नि दी।
टूटी नरेंद्र महेंद्र की जोड़ी , नरेंद्र के कंधों पर बढ़ा बोझ ,महेंद्र को नम आंखों से दी अंतिम विदाई
Reviewed by Awadh News
on
मार्च 13, 2022
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