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सीतापुर : करोड़ों रुपए की इमारत लगभग एक दशक से खा रही धूल , पात्रों के आवेदन पर नजरे इनायत नही कर रहे अफसर


सीतापुर / उत्तरप्रदेश : बसपा सरकार में गरीबों के रहने के लिए वर्ष 2011 में सैकड़ों आवासों की काशीराम कालोनी बनाई गई थी । जब तक इन आवासों के आवंटन का नम्बर आया । तब तक राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बन गई । सरकार बदलते ही जिम्मेदार अफसर इन ओर से पूरी तरह सिथिल हो गये । पाँच साल सपा और पाँच साल भाजपा की सरकार रहने के बाद भी उन अफसरों की सेहत पर गरीबों के आवास आवंटन को लेकर कोई फर्क नही पड़ा । करोड़ो की लागत से बनी काशीराम आवास योजना धीरे धीरे लोकर्पण के एक दशक बाद खड़ंहर में तबदील होती जा रही है । जब कि आवास विहीन तमाम परिवार दशकों से किराये के भवनों में रहने पर मजबूर है । और झुग्गी झोपड़ी में रह रहे है ।
बसपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए प्रत्येक शहर और कस्बे में काशीराम आवासीय योजना के तहत कालोनियां बनाई थी। इसी क्रम में सीतापुर जनपद के महमूदाबाद कस्बे के दो वार्डों में काशीराम योजना के तहत करोड़ों की लागत से सैकड़ों लोगों के रहने के लिए कालोनियां बनाई गईं थी। जिनमें से एक कालोनी में तो आवास आवंटन हुए पर दूसरी कालोनी उदासीनता के चलते खंडहर में तब्दील होती जा रही है। इन कालोनियों के निर्माण की लागत करोड़ों रुपए के आसपास आंकी जा रही है। अलग अलग सरकारों ने नई आवास योजना चलाई तो जिम्मेदार अफसरों ने पूर्व सरकार द्वारा निर्मित इन आवासों से अपना ध्यान हटा लिया। 


क्या हैं करोड़ों की लागत से बनी कालोनी के हालात -

महमूदाबाद कस्बे के इंदौरा वार्ड में बनी काशीराम आवासीय कालोनी में आवास आवंटित न होने के कारण निर्माण के दशक बाद धीरे धीरे यह खंडहर में तब्दील होती नजर आ रही है। भवन लगातार जर्जर होते जा रहे हैं , कांच की खिड़कियां टूटी नजर आ रही हैं । काशीराम कालोनी में अनैतिक लोग भी देर सबेर अपना ठिकाना बना लेते हैं। हद तो यह है कि बिना आवंटन के कुछ भवनों में लोग रहने लगे हैं। 

चोरी की बिजली के सहारे कब्जाधारी -

काशीराम कालोनी में बिना आवंटन के रहने वाले परिवारों ने मानो यहां हमेशा के लिए अपनी गृहस्थी बसाने की तैयारी कर ली है। कालोनी में सड़क से एक तार जोड़ कर विद्युत सप्लाई चोरी से लाई गई है जिससे उन भवनों में रहने वालों के घर रोशन होते हैं। वहीं इसी विद्युत सप्लाई से कालोनी में लगे मिनी नलकूप को भी कब्जाधारी चलाते हैं। 

क्या कहते हैं पात्र -

दशकों से किराए के मकान में रहता हूं। कई बार कालोनी में आवास पाने की नियत से आवेदन किया है , लेकिन आवास आवंटन ही नही हुआ। कई बार पालिका से तहसील कार्यालय तक चक्कर लगाए हैं , अब उम्मीद छोड़ चुका हूं। - राजेश शुक्ला ( नहर कालोनी )

हम 2500 रुपए महीने के किराए के कमरे में रहते हैं , जिनके पास जमीन है उन्हे वर्तमान सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना दे रही है , पर हमने कई बार कालोनी में आवास हेतु आवेदन किया पर नतीजा शून्य हो रहा। - संजय गुप्ता ( रमुवापुर)


आखिर कहां फंसा है आवंटन का पर -

2018 - 2019 में काशीराम आवास योजना हेतु कालोनी आवंटन की सूचना पर आखिरी बार आवेदन नगर पालिका परिषद कार्यलय में जमा हुए थे। जानकारी के मुताबिक उनमें से पालिका ने 52 लोगों को पात्र पाकर अगली जांच के लिए तहसील कार्यालय भेज दिया था , तहसील कार्यालय में उन लोगों की सूची किस स्तर पर रुकी हुई है , यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। अगर पालिका और तहसील प्रशासन गंभीरता के साथ पात्रों को आवास आवंटन कर दे तो सैकड़ों परिवारों को छत मिल जायेगी।

क्या बोले जिम्मेदार -

मामले का संज्ञान लेते हुए अवैध तरीके से रह रहे सभी कब्जेदारों से तत्काल आवास खाली कराए जाने का निर्देश ईओ नगर पालिका को दिया गया है। वैधानिक तरीके से यहां बने आवासों के आवंटन जल्द से जल्द किए जाने के निर्देश दिए हैं । - उपजिलाधिकारी ( दिव्या ओझा )


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