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गदर 2 शूटिंग क्या अब महमूदाबाद में हो पाएगी या उजड़ेगा शूटिंग सेट

सीतापुर के किला महमूदाबाद में शुरू होने जा रही गदर-2 फिल्म की शूटिंग को रोकने की मांग हो रही है। शिकायतकर्ता ने सीएम योगी, क्षेत्रीय विधायक सहित शत्रु सम्पत्ति से जुड़े अधिकारियों को पत्र भेजकर शूटिंग को रोके जाने की मांग की है। वहीं शूटिंग पर पाबंदी लगाने की मांग की सूचना पाकर जिन लोगों को बेवक्त रोजगार मिला था उनके मुंह उतर से गए हैं। शूटिंग सेट तैयार करने में लगे स्थानीय कारीगरों ने शूटिंग रुक जाने से काम छूट जाने की आशंका जताई है। वहीं महमूदाबाद कस्बे के व्यापारियों और युवाओं ने बताया की अगर महमूदाबाद में फिल्म एक हफ्ते भी शूट की जाती है तो कस्बे के कारीगरों , व्यापारियों और होटल संचालकों की कमाई बढ़ेगी। विकास खंड रामपुर मथुरा के ग्राम जरावन निवासी मनोज शुक्ल ने सीएम को भेजे गये पत्र में कहा कि किला महमूदाबाद राजा अमीर खान को धार्मिक आयोजनों हेतु शत्रु सम्पत्ति द्वारा आबंटित किया गया है। 



किले मे रहने वालों ने बड़ी रकम लेकर फिल्म की शूटिंग की अनुमति स्वयं दी है। इससे पूर्व भी भारी प्रतिफल देकर फिल्में शूट की गई है। क्या शत्रु सम्पत्ति विभाग को शूटिंग के लिये कोई धनराशि अदा की गई है ? उन्होंने अपने पत्र में बताया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश में पाकिस्तान जिंदाबाद के साथ पाकिस्तानी ध्वज फहराए जाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है किंतु उनके अनुसार फिल्म गदर 2 की शूटिंग के दौरान महमूदाबाद किले को पाकिस्तानी भवन दिखा कर उस पर पाकिस्तानी ध्वज फहराया जाना है ऐसे में यह राष्ट्र विरोधी कृत्य होगा। 



उनका कहना है कि शत्रु सम्पत्ति को कोई व्यक्ति प्रतिफल प्राप्त करके फिल्म की शूटिंग अपने निजी फायदे के लिये कर रहा है। इसकी जांच होना आवश्यक है। इस समय स्थानीय प्राधिकारी का निर्वाचन भी चल रहा है। ऐसे में आचार संहिता के बीच फिल्म शूटिंग की अनुमति सही नहीं है। मनोज ने सीएम योगी के साथ-साथ विधायक आशा मौर्या, अभिरक्षक शत्रु सम्पत्ति भारत सरकार, डीएम और एसडीएम को पत्र भेजकर सात अप्रैल से शुरू होने वाली शूटिंग रोकने की मांग की है। 

शूटिंग रुकने से क्या फायदे और क्या होंगे नुकसान -
   
- महमूदाबाद में प्रस्तावित गदर 2 फिल्म की शूटिंग के लिए सेट तैयार करने में करीब दो दर्जन कारपेंटर (बढ़ई) और उनके साथ दो दर्जन से अधिक मजदूर जुटे हुए हैं। वहीं सेट निर्माण में लगने वाली सामग्री भी कस्बे के ही दुकानदारों से खरीदी जा रही थी जिसकी कीमत लाखों में होती। लेकिन अभी तक आधी सामग्री भी खरीदी नही जा सकी थी जिसको लेकर कस्बे के दुकानदारों का सीधा नुकसान शूटिंग रुकने से होता नजर आ रहा है। शूटिंग के लिए किले में सेट का निर्माण करने में जुटे स्थानीय पेंटरों को भी काम खोने का डर सता रहा है , जिनकी संख्या भी दो दर्जन से ऊपर ही बताई जा रही है।

- नाम न छपने की शर्त पर कस्बे के ही एक होटल व्यवसाई ने बताया की शूटिंग में लगे स्टाफ ने पूरा होटल बुक कर लिया था , जिस में क्रू और स्टाफ करीब दस दिनों तक रुकते लेकिन अब तो लग रहा है की यह मौका भी जा रहा है। होटल व्यवसाई ने बताया की प्रतिदिन 12000 ( बारह हजार रुपए) पर दस दिनों के लिए बातचीत हुई थी लेकिन अब यह फायदा शूटिंग रुक जाने के बाद क्षेत्र के किसी होटल व्यवसाई को नही मिलेगा।

- संभ्रांत नागरिकों की मानें तो शूटिंग रुकने से सीधा फायदा किसे मिल रहा यह सवाल अभी तक क्षेत्र के लोगों के जहन से इसलिए भी नही उतर रहा है क्योंकि हिमाचल प्रदेश में शूटिंग के दौरान आर्मी क्षेत्र में भी बार्डर के सीन फिल्माए गए हैं , जहां पाकिस्तानी झंडे के साथ कई सीन फिल्माए गए हैं , फिर महमूदाबाद जैसे क्षेत्र में फिल्म शूटिंग के दौरान केवल सीन क्रिएट करने पर यह शिकायत कहीं किसी राजनैतिक भावना के तहत तो नही।

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